शुक्रवार, 10 फरवरी 2012

15 साल की उम्र और हत्या?

सुबह का अख़बार उठाया..पहले पन्ने पर ये खबर थी की  चेन्नई के १५ साल के बच्चे ने अपनी शिक्षिका को चाकू मार कर बुरी तरह घायल कर दिया और शिक्षिका की मृत्यु हो गयी..St. Mary's Anglo Indian Higher Secondary School  में पड़ने वाला नवीं कक्षा का छात्र इतना हिंसक हो गया की उसने बाज़ार से २० रूपये में सब्ज़ी काटने वाला चाकू ख़रीदा,बैग में छिपा कर लाया और जब शिक्षिका नोट्स जाँच रही थी तब उसके गले और चेहरे पर कई बार वार किया..शिक्षिका की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गयी...दूसरे शिक्षकों ने उस बच्चे को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया..
www.firstpost.com से साभार
हत्या करने का कारण पूछने पर बच्चे ने बताया की पढाई को लेकर शिक्षिका अक्सर उसे डांटा करती थी, इसीसे क्षुब्ध होकर उसने ये कदम उठाया..और हाल में रिलीज़ हुई अग्निपथ मूवी से उसे प्रेरणा मिली..उसके सहपाठियों ने बताया की अलग थलग और शांत रहने वाला बच्चा था वो. उसने इतना खतरनाक कदम कैसे उठा लिया किसी की समझ में नहीं आ रहा है.
सवाल ये उठता है की उस बच्चे कि इस मानसिकता के पीछे क्या वजह थी..कमी कहाँ रह गयी जिसकी परिणति इतने भयंकर रूप में सामने आई.
जब हम नवीं  कक्षा में थे तब कितने मासूम थे, बुरी बातें मतलब झूठ बोलना, चोरी करना, झगड़ा करना यही थीं, लेकिन हत्या!!..... ८ साल हुए हैं और हालत इतने बदल गये हैं कि पूछो मत. आठवीं कक्षा के जिस बच्चे को हम ट्यूशन पढ़ाते हैं वो बता रहा था-"दीदी! पता है हमारे क्लास के लड़के सिगरेट पीते हैं,गुटखा भी खाते हैं और पता है दीदी एक लड़का तो पिस्तौल भी लाया था स्कूल में.वो धमका रहा था लड़कों  को कि अगर पंगा लिया तो ऊपर भेज दूंगा. दीदी आज स्कूल में दो गुट के लड़के भिड गये, खूब गाली गलौज कर रहे थे..और पता है दीदी लड़कियां कहती है कि जो मुझे मोबाइल गिफ्ट करेगा उसे मैं किस दूँगी..."ये सुन कर लगता है कि हम तरक्की कर रहे हैं या बर्बाद हो रहे हैं. और जब हमारे बच्चे होंगे तो हम उन्हें किस तरह सही सिक्षा देंगे और बुराइयों से दूर रखेंगे...बहुत बड़ा काम है ये तो.परवरिश में कहीं चूक कि गुंजाईश ही नहीं है...किसका दोष है ये? समाज का, पैसे कि भूख का, फिल्म इंडस्ट्री का, सिमटते परिवारों का, तरक्की कि अंधाधुंध दौड़ का....आखिर किसका???

3 टिप्पणियाँ:

  1. हालात तेजी से बदल रहे हैं, उन पर हमें ही नजर रखकर अपने भविष्य को सुधारना होगा।

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